This article was written by me in 2009–2010 ( However lot of thing has been changed now ) while I was pursuing my graduation at Varanasi , this is purely my thoughts ……
( However lot of thing has been changed now since then – 16 Years Ago )
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हमारा हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है और सभी धर्मों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है , हिंदू धर्म में धरती को माता तथा पेड़ को भगवान कहा जाता है।
मैं यहॉं अपने मन के विचारों को सबके सामने लाना चाहता हूँ। खासकर यह मेरे हिंदू धर्म के लिये हैऔर हिंदुओं से ( जो भारत या बाहर के देशों में रह रहे हैं ) मेरी प्रार्थना है कि सभी लोग अपने-अपने धर्म के मुख्य उद्देश्य पर आएँ, तभी भारत तथा अन्य देश की सुख-शांति लौटेगी।

हमारे धर्म में मांस, मछली और इस तरह की चीज खाना पाप माना जाता है। पर आज हमारे हिंदू समाज में ये सब चीजें बड़े चाव से खायी जा रही हैं। हमारे हिंदू धर्म के लोग गाय का मांस नहीं खाते क्योंकि हम गाय को माता मानते हैं। पर हम लोग यह क्यों नहीं सोचते कि बकरी और मुर्गी भी किसी की माँ है। यहाँ पर कुछ लोग कहेंगे कि हमारे पूर्वज भी यह सब खाते थे। पर जरा सोचिये कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में यह कहीं नहीं कहा गया है कि किसी जानवर को स्वाद और प्रोटीन के लिए मारकर खा लिया जाए। इस पर वैज्ञानिक लोग कहेंगे कि यह जीवन-चक्र है जहाँ पर सभी जानवर एक-दूसरे को खाते हैं। पर वैज्ञानिक लोग चीन के भूकंप के बारे में सोचें, जहाँ पर लाखों आदमी और करोड़ों जीव-जन्तु मर गए, यहाँ पर यह जीवन-चक्र कहा गया। यह सब भगवान के हाथ में है, वह जब चाहे कुछ भी कर सकते हैं।
हमारा हिंदू धर्म आज बहुत परेशानी की स्थिति में है। इसका सीधा कारण है – हमारी बुराइयाँ। अगर हम अपनी बुराइयों को स्वीकार कर खत्म कर दें तो वह दिन दूर नहीं होगा जब हिंदू धर्म एक बार फिर विश्व-शिरमौर होगा। हम लोगों को जरूरत है कि अपनी कुछ पुरानी सभ्यताओं को हटाकर नया सभ्यता लाने की कोशिश करें। जैसे कि हमारे धर्म में किसी के मरने पर उसकी आत्मा कि शांति के लिए बहुत से लोगों को खाना खिलाया जाता है। हमारे इस रीति-रिवाज से मरने वाले के घर वालों को बहुत सी परेशानियाँ उथानी पड़ती है और खाना खाने वाले लोग खाने के बाद सब्जी ठीक नहीं थी, वो ठीक नहीं था, ऐसा कहकर चले जाते हैं। उन लोगों को यह एहसास भी नहीं होता कि जिनके घर आए हैं, उन लोगों पर क्या बीत रही होगी।
इसके बाद मैं हिंदुओं को भगवान के मंदिर के तरफ भी ध्यान दिलाना चाहता हूँ। आप सब भी यह देखे होंगे कि भगवान के मंदिर में भीड़, धक्का-मुक्की आदि से बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कभी-कभी ये लोग अगर गिर जाते हैं तो उन्हें उठाने वाले बहुत कम ही होते हैं।
हमारे कुछ मंदिर में वहाँ के पण्डे-पुजारी श्रद्धालुओं से पैसा लेकर उन्हें स्पेशल दर्शन करवाते हैं। बहुत से श्रद्धालु अधिक मात्रा में फल, मिठाई और पैसा खर्च करते हैं। पर भगवान के शरण में जाने वाले लोगों को क्या यह नहीं पता कि उनका चढ़ावा भगवान के पास नहीं जाता। हमारे श्रद्धालुओं को यह पता होना चाहिए कि भगवान कहते हैं कि जीव-जन्तुओं, गरीबों और बीमारों की सेवा करना ही असली पूजा है। मेरा यह कहने का मतलब नहीं है कि आप मंदिर ना जाएँ, पर थोड़ा खर्च करें और बाकी पैसों को जरूरतमंदों में दान करें।
आप लोग यह भी देखे होंगे कि बहुत से लोग अंधे, भिखमंगे बनकर मंदिर के बाहर खड़े रहते हैं और ये लोग श्रद्धालुओं से मिठाइयाँ और पैसे माँगते हैं। लोग उन पर दया करके इनको वो सब दे देते हैं। हम सोचते हैं कि हम इनकी मदद कर रहे हैं, पर ये लोग मिठाइयों को फिर से दुकान पर बेच देते हैं। हम लोगों को इनको पैसा आदि देने के बजाय एकजुट होकर अनाथालय या आश्रम बनवाना चाहिए, जहाँ पर ये लोग रह सकें। हिंदू समाज में भगवान के नाम पर लूटने और खाने वाले बहुत लोग हैं पर सही जगह पर पैसे का प्रयोग करने वाले नहीं। कुछ दिन पहले मैंने एक पेपर में पढ़ा था भारत के एक बहुत बड़े आदमी और कुछ अप्रवासी भारतीय मंदिरों को करोड़ों रुपए दान में दिए। हमारे इन हिंदू जन को सोचना चाहिए कि इससे क्या फायदा हुआ, सिर्फ मंदिर के संगठन के लोग फालतू में पैसा बर्बाद करते हैं। अगर यही पैसा वे लोग गरीबों, जानवरों की सहायता में लगाते तो भगवान निश्चित ही खुश होते और अशीर्वाद देते।
हिंदू धर्म का कोई मंदिर जो साउथ इंडिया में है, वहाँ पर मैंने सुना है कि ५ रुपए से लेकर ७००-८०० रुपए तक प्रसाद मिलता है जिसके पास जितना पैसा, वह उतना ही महँगा प्रसाद चढ़ाता है। हम सबको क्या यह नहीं पता कि भगवान निःस्वार्थ भाव से पूजा माँगते हैं न कि महँगा प्रसाद। अगर कोई आदमी पाप करने के बाद ५०० वाला प्रसाद मंदिर में ले जाएगा तो क्या भगवान प्रसन्न होंगे, ये नामुमकिन है। हमारे हिंदुओं को कृष्ण जी के बारे में सोचना चाहिए, जो कौरवों के अच्छे पकवानों को छोड़कर बिदुर जी का साधारण खाना खाए थे और भगवान राम ने सबरी के निःस्वार्थ भाव से खिलाए गए बेर खाए थे। उसी तरह का पूजा भगवान को चाहिए न कि महँगा प्रसाद। हिंदुओं को इस बात को समझना चाहिए।
मैंने हिंदुओं के मंदिरों के जितना भ्रष्टाचार आज तक किसी चर्च में नहीं देखा, चर्च में लोग शांति से पूजा-प्रार्थना करते हैं। पर हमारे मंदिरों में विशेष दिन जैसे मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करना बहुत कठिन है, क्योकिं वहाँ पर कोई व्यवस्था नहीं रहती।
मुझे सबसे ज्यादा अफसोस, जब कोई हिंदू मीट-मछली खाता है, मैं सोचता हूँ कि ऐसे लोग भगवान के मंदिर में जाने लयक नहीं हैं, ये पापी हैं। कुछ साल पहले मैंने पढ़ा था कि पश्चिम बंगाल के किसी मंदिर में प्रसाद के रूप में मछली मिलती है। मुझे यह पढ़कर बहुत दुख हुआ कि कहीं भगवान यह थोड़े कहते हैं कि उनके द्वारा बनाए गए जीव-जन्तु, जो हम लोगों की तरह भगवान के बच्चे हैं, उनको ही खिलाया जाए। यह हिंदुओं का अंधविश्वास जो किसी ने चलाया था और आज तक यह चल रहा है।

हिंदू धर्म में कहीं-कहीं पर काफी ज्यादा भ्रष्टाचार फैला है। अपनी पढ़ाई के समय में मैंने बनारस में देखा कि हर शाम एक मंदिर का पुजारी आरती होने के बाद पूरे बाज़ार में आरती लेकर घूमता और भगवान के नाम पर पैसे वसूलता। हिंदू धर्म में कुछ लोग जगह-जगह पर मंदिर बनवा कर पैसा कमा रहे हैं। आज बहुत से हिंदू मंदिर में भगदड़, तो कहीं पर कुछ ना कुछ भ्रष्टाचार फैला हुआ है। कुछ लोग स्वार्थी बनकर हिंदू धर्म को बदनाम कर रहे हैं।
अभी कुछ साल पहले की बात है हिंदू धर्म के एक पवित्र शक्तिपीठ में बड़े महंत और उनके सहायक महंत में पैसे को लेकर झगड़ा हुआ जिससे हिंदु धर्म की काफी निंदा हुई।
अगर हम मीट-मछली की बात करें तो हिंदू धर्म में बहुत लोग यह कहते हुए मिलेंगे कि मुस्लिम लोग गाय का मांस खाते हैं, यह पाप है। माना कि यह बात सही है पर परंतु हम लोग गाय का मांस खाने पर इसलिए चिल्लाते हैं क्योंकि गाय हमारे धर्म के अनुसार माता मानी जाती है। पर इससे पहले हिंदुओं को बकरियों, मुर्गियों और मछलियों के बारे में सोचना चाहिये क्योंकि ये सभी तो किसी ना किसी की माता हैं।
हमारे हिंदू धर्म में आज भी कुछ जगह पर निचली जाति के लोगों को बड़े जातियों के लोग अपने बर्तन में भोजन नहीं देते। वाराणसी में अपनी पढ़ाई के समय ही मैं जहाँ पर रहता था वहाँ पर कुछ बड़ी जातियों के लड़के रहते थे, वे लोग मिलकर एक गरीब दलित लड़के को गाली देते थे और उसके छुए बर्तनों को वे लोग नहीं छूते थे।कहीं ऐसा भी हमारे ग्रंथों में लिखा गया है?उसी समय मैंने देखा वो लड़के पूजा भी करते थे पर उन लोगों को क्या ये नहीं पता कि हमारे भगवान यह नहीं कहते कि किसी को जाति के नाम पर सताओ और गाली दो, क्योंकि भगवान ने सभी को एक समान बनाया है, सभी उनके संतान हैंऔर जब हमारे भगवान सभी अपना संतान समझते हैं तो यहाँ पर भेदभाव कयों ?
अभी कुछ ही समय की बात है वारणसी में एक जगह पर बंदरों से परेशान आकर एक आदमी ने गोली मार दिया, कुछ बंदर मर गये इस पर काफी बवाल मचा। मरे हुए बंदरों का अंतिम संस्कार हिंदू धर्म के अनुसार गंगा जी के किनारे हआ, क्योंकि बंदर को हनुमान जी का अवतार माना जाता है। पर काश इसी तरह हम लोग उन प्यारे मासूम मछलियों, बकरियोंऔर मुर्गियों को देखें जो सड़कों के किनारे प्रतिदिन काट कर बेच दिये जाते हैं।हमारे धर्म में बंदरों को हनुमान जी का अवतार माना जाता है । सही है, पर भगवान यह नहीं कहते कि हमारी और संताने जो पृथ्वी पर हैं उनको स्वाद के लिये तड़पाकर मार डालो।
इन सब से बड़ी बात, मैं अपनी गौ माता के बारे मे लिखना चाहता हूँ – हमारे धर्म में गाय को माता माना जाता है पर हमारे कुछ हिंदू जन गौ माता के मरने के बाद गौ माता के मृत शरीर को ५०-१०० रूपये में एक कसाई जाति के लोगों को बेच देते हैं और वो लोग गौ माता के शरीर को काट कर खाते हैं, चमड़े को बेच देते हैं और बाकी शरीर के हिस्सों को कुत्ते, गिद्धऔर कीड़े-मकौड़े हफ्तों तक खाते हैं।क्या हम पाप नहीं कर रहे हैं, एक तरफ हम लोग कहते हैं कि गाय हमारी माता है, दूसरी तरफ हम अपनी गौ माता को ही थोड़े पैसों के लिये कुत्तों, कीडों-मकौड़ों के लिये छोड़ देते हैं।
क्या हम अपनी गौ माता के शरीर को अपनी माओं के शरीर की तरह अंतिम संस्कार नहीं कर सकते ?
हमारे देश में बहुत सी पार्टियाँ और संस्थाएँ हैं जो हिंदू धर्म की रक्षा और बुराइयों को दूर करने का दावा करती हैं, जैसे – बिहिप, बजरंग दल और शिव सेना आदि .
हमारे देश में पेटा जैसी संस्थाएँ भी काम करती हैं पर शायद ये लोग सिर्फ प्रचार करना चाहते हैं काम नहीं।
मेरे लिखने का उद्द्येश्य यह नहीं है कि हम अपने धर्म की बुराई करें। मैं सिर्फ ये चाहता हूँ कि हम लोग अपनी गलतियों को समझें और उनको सुधारने का प्रयास करें, तभी हम असली हिंदू बन पाएँगे।
